Patna: बिहार की सियासत एक बड़े मोड़ पर खड़ी दिख रही है। मुख्यमंत्री पद से Nitish Kumar के इस्तीफे ने सिर्फ राजनीतिक समीकरण नहीं बदले, बल्कि उनके समर्थकों के बीच भावनात्मक खालीपन भी छोड़ दिया है। राज्यसभा की ओर उनके कदम बढ़ाते ही जदयू खेमे में एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है—जहां सम्मान, यादें और भावनाएं एक साथ उमड़ रही हैं।पार्टी के वरिष्ठ नेता Ashok Choudhary और Sanjay Singh ने खुलकर कहा कि “नीतीश जैसा नेता मिलना आसान नहीं है।” उनका मानना है कि सदन में अब उस अनुभव और संतुलित सोच की कमी खलेगी, जो वर्षों तक बिहार की राजनीति को दिशा देती रही।नीतीश कुमार के कार्यकाल को याद करते हुए नेताओं ने खास तौर पर उनके सामाजिक सुधारों का जिक्र किया—खासकर बेटियों की शिक्षा को लेकर उठाए गए कदम।
“पोशाक योजना” जैसी पहल ने न सिर्फ स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ाई, बल्कि समाज की सोच को भी बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।अब सवाल ये नहीं कि नीतीश कुमार कहां गए, बल्कि ये है कि उनके बाद उस राजनीतिक विरासत को कौन और कैसे आगे बढ़ाएगा। बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ पद का नहीं, बल्कि एक पूरे दौर के अंत और नए अध्याय की शुरुआत जैसा महसूस हो रहा है।
